नयी दिल्ली,14 दिसंबर,पूर्व केन्द्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने आज कहा कि केन्द्र सरकार की पाकिस्तान के सबंध में कोई स्पष्ट नीति नहीं है। दोनों देशों के बीच कभी वार्ता शुरु होती है तो कभी रद्द होती है यह सिलसिला पिछले 18 महीनों से जारी है। श्री शर्मा विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पाकिस्तान यात्रा के बारे में आज ससंद में दिए गए बयान पर यहां एक संवाददाता सम्मेलन में बोल रहे थे। उन्हाेंने कहा कि पाकिस्तान के साथ शांतिपूर्ण वार्ता की कांग्रेस भी हमेशा से पक्षधर रही है लेकिन ऐसी कोई भी वार्ता सतत और ठोस धरातल पर होनी चाहिए और इसमें भारत के हिताें को प्रमुखता से रखा जाना चाहिए।
श्री शर्मा ने कहा कि सुषमा जी अपनी पाकिस्तान यात्रा को बड़ी कामयाबी बता रही हैं लेकिन कांग्रेस यह जानना चाहती है कि इसबार की द्विपक्षीय वार्ता में उन्होंने अफगानिस्तान से जुड़े भारतीय हितों, सीमापार व्यापार, मुंबई हमलों के दोषियों को सजा और दोनों मुल्कों की जनता के बीच संपर्क के मसले पर कोई चर्चा क्यों नहीं की। आखिर ऐसी क्या मजबूरी भी थी कि इन अहम मसलों पर भारत ने चुप्पी साध ली।
उन्होंने कहा कि सुषमा जी का बार-बार यह कहना कि वार्ता को पाकिस्तान की सहूलियत के हिसाब से आगे बढ़ाया जाएगा बड़ा ही हैरान करने वाला है। पाकिस्तान की सहूलियत की बात हो रही है लेकिन वहीं अफगानिस्तान को नजरअंदाज किया जा रहा है। जबकि अबतक पाकिस्तान के साथ जितनी भी वार्ता हुई है उसमें अफगानिस्तान में सीमापार से आतंकवाद का मसला हमेशा से शामिल रहा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि काबुल में भारत के दूतावास पर तीन बार आतंकी हमला हो चुका है। क्या यह भारत के लिए कोई अहमियत नहीं रखता।
इस बार की वार्ता में दूसरी बड़ी चूक आतंकवाद से निबटने के लिए एक संयुक्त तंत्र विकसित करने के बारे में काेई चर्चा नहीं किया जाना था। हवाना में हुए गुटनिरपेक्ष सम्मेलन में दोनों देशों ने ऐसा तंत्र विकसित किए जाने का संकल्प लिया था। पर इस बार इसे भी नजर अंदाज किया गया।