नयी दिल्ली/कोच्चि 15 दिसम्बर (वार्ता) पाकिस्तान के साथ वार्ता शुरू करने के सरकार के निर्णय को उचित ठहराते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि यह कदम इतिहास बदलने की कोशिश और आतंकवाद की समस्या का समाधान करने के लिए उठाया गया है । नौसेना की शक्ति का प्रतीक माने जाने वाले विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य पर कोच्चि में सेना के तीनों अंगों के संयुक्त कमान सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि पडोसी देश को आतंकवाद पर उसकी प्रतिबद्धता के आधार पर परखा जायेगा। उन्होंने कहा कि इस रास्ते में कई चुनौतियां और बाधाएं हैं लेकिन देश की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं किया जायेगा। उन्होंने कहा ,“ हम इतिहास को बदलने की कोशिश के तहत तथा आतंकवाद के खात्मे , शांतिपूर्ण संबंधों , सहयोग बढाने और क्षेत्र में स्थिरता व समृद्धि के लिए पाकिस्तान के साथ वार्ता कर रहे हैं। ” उन्होंने कहा ,“इस राह में कई चुनौतियां तथा बाधाएं हैं लेकिन यह कोशिश इसलिए जरूरी है क्योंकि हमारे बच्चों का भविष्य दाव पर लगा है । इसलिए हम उनकी मंशा को परखेंगे जिससे कि आगे का मार्ग प्रशस्त हो सके । राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की वातचीत इसलिए शुरू की गई है जिससे कि सुरक्षा विशेषज्ञ आमने सामने बैठ कर बात कर सकें।” उन्होंने कहा,“ हम सुरक्षा के साथ किसी तरह का समझौता नहीं करेंगे और आतंकवाद पर उनकी प्रतिबद्धता का आकलन करते रहेंगे।”
यह पहला मौका है जब संयुक्त सैन्य कमांडरों के सम्मेलन का आयोजन दिल्ली से बाहर और वह भी किसी विमानवाहक पोत पर किया गया है। श्री मोदी ने कहा,“ हम खुद को तब तक एक सुरक्षित राष्ट्र एवं सुदृढ़ सैन्य शक्ति नहीं कह सकते, जब तक कि हम घरेलू क्षमताएं विकसित न कर लें। इससे रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में मजबूती के साथ साथ देश में उद्योग, रोजगार और आर्थिक विकास का रास्ता प्रशस्त होगा। ” उन्होंने कहा कि सभी प्रमुख देशों की तरह भारत भी उच्च प्रौद्योगिकी पर जोर दे जा रहा है । ऐसे रक्षा बलों की जरूरत है जो न केवल वीर हो, बल्कि चुस्त, मोबाइल और प्रौद्योगिकी द्वारा संचालित भी हो। सशस्त्र सेनाओं को अकस्मात होने वाले युद्धों को जीतने की क्षमातायें हासिल करने की जरूरत है, इसमें लम्बे समय तक चलने वाले युद्धों की परंपरागत तैयारी काम नहीं आयेगी। उन्होंने कहा ,“हमें अपनी क्षमताओं में डिजिटल नेटवर्कों एवं अंतरिक्ष संबंधी परिसम्पत्तियों की ताकत को भी पूरी तरह से शामिल करना चाहिए। इसके साथ ही हमें उनका बचाव करने के लिए भी पूरी तरह से तैयार रहना चाहिए, क्योंकि हमारे दुश्मनों के निशाने पर सबसे पहले वही रहेंगे।”
उन्होंने कहा कि भारत परिवर्तन के एक रोमांचक क्षण से गुजर रहा है। देश में आशा , आत्मविश्वास का दौर चल रहा है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी इसमें दिलचस्पी ले रहा है। आज भारत विश्व में सबसे तेजी से बढ़ती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्था बन गया है। हमारे कारखाने फिर से उत्पादन में जुटे हुए हैं और देश भविष्य पर एक नजर रखते हुए उच्च गति से अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है। विदेशी निवेश तेजी से बढ़ रहा है। हर नागरिक अवसरों से भरा भविष्य देख सकता है और विश्वास के साथ बुनियादी जरूरतों को पूरा कर सकता है। भारत की समृद्धि और हमारी सुरक्षा के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है। श्री मोदी ने कहा,“हमारी विदेश नीति में तेजी आई है और हमने परम्परागत भागीदारी को जापान, कोरिया और आसियान के साथ मजबूत बनाया है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, मंगोलिया और प्रशांत द्वीप समूह के साथ भी नई शुरूआत की गई है। भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी पहुंच बढायी है और और पहली बार अपने समुद्री क्षेत्र के लिए एक स्पष्ट रणनीति व्यक्त की है। हमने अमेरिका के साथ रक्षा सहित एक व्यापक तरीके से अपनी भागीदारी को आगे बढ़ाया है। यूरोप में भी हमारी रणनीतिक साझेदारी मजबूत हुई है। भातर अपनी आर्थिक भागीदारी की क्षमता का पूरा उपयोग करने के लिए चीन के साथ नजदीकी संबंधों को आगे बढ़ा रहा है।
श्री मोदी ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि रक्षा बल किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने एवं उसे विफल करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। उन्होंने कहा ,“हमारे परमाणु सिद्धांत के अनुरूप हमारा सामरिक शक्ति संतुलन मजबूत एवं विश्वसनीय है और हमारी राजनीतिक इच्छाशक्ति स्पष्ट है। हमने रक्षा खरीद की प्रक्रिया तेज कर दी है। हमने अनेक लम्बित अधिग्रहणों को मंजूरी दे दी है। हम किसी भी किल्लत को खत्म करने और प्रतिस्थापन के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं।” उन्होंने कहा कि सीमा पर बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के विस्तारीकरण की गति को तेज किया जा रहा है और रक्षा बलों एवं उपकरणों की गतिशीलता को बेहतर किया जा रहा है। उन्होंने कहा,“ हम मौलिक नई नीतियों एवं पहलों के जरिये भारत में रक्षा विनिर्माण में बदलाव ला रहे हैं। सार्वजनिक क्षेत्र इस चुनौती से निपटने के लिए कमर कस रहा है। निजी क्षेत्र ने बड़े उत्साह के साथ प्रतिक्रिया व्यक्त की है।” प्रधानमंत्री ने आईएनएस विक्रमादित्य पर चढ़ने से पहले सुबह कोच्चि में आईएनएस गरुड़ पर तीनों सेनाओं के गार्ड ऑफ ऑनर की सलामी का निरीक्षण किया, जहां तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने उनकी अगवानी की। सम्मेलन के बाद प्रधानमंत्री ने भारतीय नौसेना के परिचालन प्रदर्शन और समुद्री हवाई क्षमताओं का निरीक्षण किया। परिचालन प्रदर्शन में आईएनएस विक्रमादित्य से नौसेना के लड़ाकू विमान के उड़ने और उतरने का प्रदर्शन, युद्धपोत से मिसाइल फायरिंग करने, हेलीकॉप्टर और लड़ाकू विमान की उड़ान, समुद्री कमांडों के परिचालन, आईएनएस विराट सहित युद्धपोतों की स्टीम् पास्ट आदि शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने आईएनएस विक्रमादित्य के बोर्ड पर सैनिकों, नाविकों और वायु सैनिकों के साथ बातचीत की।