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आर्थिक सशक्तिकरण में महिलाओं का योगदान राष्ट्रीय औसत से अधिक

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भोपाल 15 दिसम्बर, आर्थिक सशक्तिकरण में महिलाओं का योगदान मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय औसत से अधिक है। वर्ष 2011 की जनगणना में प्रदेश की कुल महिला जनसंख्या के अनुपात में विभिन्न कार्यक्षेत्र में कार्यरत महिलाओं की भागीदारी 32.60 प्रतिशत है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत महिलाओं की भागीदारी का प्रतिशत 25.5 है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार आयुक्त महिला सशक्तिकरण श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव ने आज महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम-2013 पर जेंडर संवेदीकरण प्रशिक्षण एवं क्षमतावर्धन पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए यह जानकारी दी। कार्यशाला महिला-बाल विकास, यू.एन. वूमेन और लायर कलेक्टिव राइट इनीशियेटिव द्वारा की जा रही है। आयुक्त ने बताया कि कार्यक्षेत्र में काम कर रही महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध करवाने के लिये सभी जिले में मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को पदेन जिला अधिकारी बनाया गया है। अधिनियम 2013 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी जिले में महिला सशक्तिकरण अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। 

उन्होंने बताया कि 51 जिले में आंतरिक परिवार समिति का गठन सभी विभाग में किया जा चुका है। गैर शासकीय कार्यालयों एवं सार्वजनिक उपक्रमों में भी आंतरिक परिवार समिति गठन की प्रक्रिया जारी। उन्होंने बताया कि सभी जिले और संभाग में अधिनियम-2013 के प्रति जागरूकता लाने की जानकारी देने प्रशिक्षण कार्यशाला की जा रही है। अधिनियम के क्रियान्वयन की नियमित मॉनीटरिंग और समीक्षा भी हो रही है। श्रीमती श्रीवास्तव ने बताया कि असंगठित क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं के ऐसे कार्यालय जहाँ 10 से कम कर्मचारी हैं वहाँ भी सभी 50 जिले में परिवार समिति गठित हो चुकी है। महिला सशक्तिकरण संचालनालय ने नेशनल लॉ युनिवर्सिटी के सहयोग से प्रशिक्षण का मैनुअल तैयार किया है जिसका उपयोग मास्टर्स ट्रेनर्स द्वारा मैदानी अमले को प्रशिक्षण में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि 2013 अधिनियम का कार्यरूप में प्रभावी कियान्वयन हो ताकि प्रत्येक महिला अपने को सशक्त और सुरक्षित महसूस कर सके। 

नेशनल लॉ इंस्ट्टियूट के संचालक प्रो. एस.एस. सिंह ने कहा कि कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये यह जरूरी है कि महिलाओं के साथ ही हर स्तर पर यह चुप्पी तोड़ने का यह भय समाप्त हो कि इससे बदनामी होगी। अधिनियम के पालन में संस्थागत जिम्मेदारी भी स्पष्ट होना चाहिए। यू.एन.वूमेन की सुश्री मंजू पांडे ने कहा कि आज महिलाओं की स्थिति में बदलाव आया है। लगभग 92 प्रतिशत महिलाएँ असंगठित क्षेत्र में काम कर रही है। अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जरूरी है कि कानून के बारे में जागरूकता लाने के साथ ही उसके उपयोग के लिए लोगों के क्षमतावर्धन लाने के प्रयास करना होंगे। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही लोगों के मांइड सेट और कार्य संस्कृति में भी बदलाव लाना होगा। उन्होंने कानून के क्रियान्वयन पर भी निरंतर निगरानी रखते हुए समीक्षा की आवश्यकता पर बल दिया। सुश्री पांडे ने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए की गई पहल की सराहना की। 

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