पटना।‘पिजड़े की पक्षी रे तेरा दर्द न जाने कोय’। लगभग ऐसी ही स्थिति जुसी कुमारी की है। सीमित दायरे में जुसी की जिदंगी सिमटकर रह गयी है। 5 साल से धरती पकड़ हो गयी है। धरती पर ही उठ ही नहीं सकती हैं। गरीबी का दंश झेलने वाले परिवार जुसी पर से नजर हटा लिए हैं। अब नजर जुसी की छोटी बहन जूली कुमारी पर फेर लिए हैं। अब जुसी की चिन्ता छोड़ जूली पर चिन्ता करने लगे हैं। जूली की शादी को लेकर परिवार के लोग परेशान होने लगे हैं।
इस बाबत जुसी कुमारी को शिकायत नहीं है। शिकायत तो यह है कि कब कोई इंसान आकर सहायता देकर पैर से चलने लायक बना दें। 5 साल से पैर नहीं पसारने से घाव भी होने लगा है। वह कपड़ा हटाकर घाव को दिखाती है। कुर्सी पर बैठने का असफल प्रयास करती हैं। परन्तु कुर्सी पर बैठ नहीं पातती है। उसकी माँ लीला देवी कहती हैं कि जब जुसी को पेंशन मिलता है तो 2 सौ रू0 दे देते हैं। इससे पानी पुरी और चाट खरीदकर खाती है। जब पैसा खत्म हो जाता है। तो मचलने लगती हैं। परन्तु माँ-बाप पर प्रकट नहीं करती हैं। जुसी कहती है कि सादा भोजन और उच्च विचार रखती हैं। वह चाहती हैं कि किसी जगह नौकरी करके पैर पर खड़े हो जाए। इसके पहले इलाज करवाना है। हां, पैसा तो नहीं है। कोई न कोई दाता सामने आ ही जाएगा।
बगल में खड़ी खुशी कुमारी कहती है कि टी0वी0शो में खेलने के बदले राशि मिलती तो अपनी दीदी जुसी कुमारी के पैर ठीक करवा पाती। अभी कलर टी0वी0 पर गेम शो चल रहा था। वह किसी फिल्मी तारिकाओं से निवेदन करती है कि गेम शो खेलकर मेरी दीदी को ठीक करवाने में सहयोग करें।